उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सभी को चौंका दिया। केवटा तालाब बस्ती के रहने वाले राकेश 7 फरवरी को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल में भर्ती हुए थे। जब ऑपरेशन के बाद उनकी आंखों की पट्टी हटाई गई, तो उन्होंने जो देखा, उस पर यकीन करना मुश्किल था। बगल के बेड पर उनकी 23 दिनों से लापता पत्नी शांति देवी भर्ती थीं। लेकिन सिर पर लगी गंभीर चोट के कारण वह अपने ही पति को पहचान नहीं पाईं। डॉक्टरों के मुताबिक, चोट की वजह से शांति देवी की याददाश्त प्रभावित हुई थी, जिससे वह कुछ भी समझने और पहचानने में असमर्थ थीं।
राकेश (50) ने बताया कि उनकी पत्नी 13 जनवरी को अचानक घर से लापता हो गई थीं। उन्होंने उन्नाव, कानपुर, लखनऊ और कन्नौज तक पत्नी को ढूंढा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार, 16 जनवरी को थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। इस बीच, अस्पताल में भर्ती शांति देवी का इलाज चल रहा था, लेकिन लापरवाही के आरोप भी सामने आए हैं। राकेश का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने समय पर उनकी पत्नी की पहचान करने की कोशिश नहीं की, जिससे वह 23 दिनों तक अनजान हालात में भर्ती रहीं।
जब राकेश की आंखों की पट्टी खुली, तो पास के बेड पर भर्ती महिला ने पानी मांगा। आवाज सुनते ही वह चौंक गए और पास जाकर देखा, तो उनकी आंखें नम हो गईं। वह उनकी गुमशुदा पत्नी थीं। हालांकि, सिर की चोट के कारण शांति देवी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। अब राकेश खुद उनकी देखभाल कर रहे हैं, और शांति धीरे-धीरे उन्हें पहचानने लगी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है, लेकिन इस घटना ने अस्पताल की लापरवाही को भी उजागर कर दिया है।







Total Users : 12936
Total views : 32843