Friday, March 28, 2025

9 गोलियां खाने के बावजूद आतंकियों से लड़े, कीर्ति चक्र से सम्मानित हुए CRPF कमांडेंट की बहादुरी की कहानी

देश की रक्षा में अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले वीरों की कहानियाँ इतिहास के पन्नों में दर्ज होती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है CRPF कमांडेंट चेतन चीता की, जिन्होंने आतंकियों से लोहा लेते हुए 9 गोलियां खाईं, एक माह से अधिक समय तक कोमा में रहे और फिर जिंदगी की जंग जीतकर घर लौटे। राजस्थान के कोटा निवासी चेतन चीता को उनकी असाधारण बहादुरी के लिए राष्ट्रपति भवन में कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। वे कहते हैं कि ‘चीता’ सिर्फ उनका नाम नहीं बल्कि उनके परिवार का गोत्र भी है, जिसे वे गर्व से अपने नाम में लगाते हैं।

यह घटना 14 फरवरी 2017 की है, जब कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ अभियान के दौरान चेतन चीता को 9 गोलियां लगी थीं। इसके बावजूद उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा और बहादुरी से आतंकियों का मुकाबला किया। उनकी टुकड़ी को जैसे ही घुसपैठ की खबर मिली, CRPF, सेना और पुलिस की टीम हरकत में आई। लेकिन आतंकियों को पहले ही इनकी हलचल की भनक लग चुकी थी और उन्होंने घात लगाकर हमला कर दिया।

आतंकियों ने अचानक AK-47 से बर्स्ट फायर कर दिया, जिसमें कुल 30 गोलियाँ चलीं और इनमें से 9 चेतन चीता के शरीर में समा गईं। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी को मार गिराया। चेतन ने 16 राउंड फायर किए, जिससे उनकी टुकड़ी को स्थिति संभालने का समय मिल गया और बाकी तीन आतंकियों को भी मार गिराया गया।

गंभीर रूप से घायल चेतन चीता को श्रीनगर के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर भी उनकी जीवटता देखकर हैरान थे, क्योंकि इतनी गोलियाँ लगने के बाद किसी का बचना लगभग नामुमकिन होता है। उनके सिर, हाथ और आँखों में गंभीर चोटें आई थीं। उनके दाहिने दिमाग में हेमरेज था, जिसे सफलतापूर्वक ऑपरेट किया गया।

अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात करते हुए चेतन चीता बताते हैं कि उनका गोत्र ‘चीता’ है और उनके पिता का नाम रामगोपाल चीता है। उनका परिवार राजस्थान के मीणा समुदाय से आता है। उनकी पत्नी उमा से उनका रिश्ता 28 वर्षों से है। दोनों की दोस्ती दसवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान हुई थी, जो बाद में रिश्ते में बदल गई। उनकी पत्नी के पिता भी भारतीय सेना से लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे।

चेतन चीता ने अपने संघर्ष को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कभी हार मानना नहीं सीखा। वे हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हैं और देश सेवा में किसी भी तरह की बाधा को स्वीकार करने के लिए तैयार रहते हैं। अपनी बहादुरी के चलते वे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

CRPF कमांडेंट चेतन चीता का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस और संकल्प के साथ डटे रहना ही असली वीरता है। उनकी कहानी केवल युद्ध के मैदान में बहादुरी दिखाने की नहीं, बल्कि जीवटता और इच्छाशक्ति की मिसाल भी है। उनका सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन सभी वीर जवानों का सम्मान है, जो देश की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में डटे रहते हैं।

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