Sunday, March 29, 2026

Pulwama Attack: जब दहला था देश, शहीद हुए थे 40 जवान, आज भी जिंदा हैं उस काले दिन की यादें

14 फरवरी 2019—एक तारीख जो भारतीय इतिहास में एक गहरे जख्म की तरह दर्ज हो चुकी है। इस दिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी कार को सीआरपीएफ की बस से टकरा दिया था, जिससे एक भयानक विस्फोट हुआ। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना ने न केवल देश की सुरक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया, बल्कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में भी भारी तनाव पैदा कर दिया।

हमले के दिन सीआरपीएफ का एक विशाल काफिला जम्मू से श्रीनगर की ओर बढ़ रहा था। 78 बसों में कुल 2500 जवान सवार थे, जब अचानक पुलवामा के अवंतीपोरा क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने अपनी विस्फोटकों से भरी कार को काफिले की एक बस से टकरा दिया। टक्कर होते ही एक भीषण धमाका हुआ, जिसने पूरी बस को चकनाचूर कर दिया। धमाके की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी, और चारों तरफ धुआं और मलबा फैल गया।

इस हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया। भारत सरकार ने आतंकवादियों को सबक सिखाने के लिए कड़ा फैसला लिया। हमले के ठीक 12 दिन बाद, 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर दी। भारतीय वायुसेना के 12 मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने रात के अंधेरे में नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में करीब 300 आतंकियों के मारे जाने की खबरें सामने आईं। भारतीय वायुसेना ने लगभग 1000 किलोग्राम विस्फोटक गिराकर आतंकी शिविरों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया।

पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड जैश-ए-मोहम्मद को माना जाता है और इसे अंजाम देने वाला आतंकी आदिल अहमद डार था। वह पुलवामा का ही रहने वाला था और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ था। इस हमले के बाद भारतीय सेना, एनआईए (NIA) और खुफिया एजेंसियों ने इस हमले की गहन जांच की। एनआईए ने करीब 13,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कई आतंकियों के नाम उजागर हुए। सुरक्षाबलों ने जल्द ही आदिल अहमद डार और उसके अन्य साथियों को एक ऑपरेशन के दौरान मार गिराया।

आज पुलवामा हमले को छह साल हो चुके हैं, लेकिन उन शहीद जवानों की यादें आज भी देशवासियों के दिलों में ताजा हैं। हर साल 14 फरवरी को पूरे भारत में इन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है। पुलवामा हमला सिर्फ एक घटना नहीं थी, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती थी, जिसका जवाब भारत ने मजबूती से दिया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगा और हर हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा।

हालांकि भारत ने पुलवामा हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए, लेकिन आज भी देश के सामने आतंकी चुनौतियां बनी हुई हैं। कश्मीर में आए दिन आतंकी घटनाएं होती रहती हैं, और सुरक्षा बलों को लगातार चौकस रहना पड़ता है। भारत सरकार द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों की वजह से हालात में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। यह जरूरी है कि देशवासी सतर्क रहें और सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग करें, ताकि भविष्य में किसी भी पुलवामा जैसे हमले को टाला जा सके।

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