खौफनाक साजिश की परतें खुलीं, जानिए कैसे अंजाम दिया गया ‘अंधे कत्ल’ को?
झारड़ा थाना क्षेत्र में एक रहस्यमयी हत्या का पर्दाफाश हुआ, जिसने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया। खेत पर सो रहे दिव्यांग वृद्ध अर्जुनसिंह (62) की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस के लिए यह मामला एक अंधे कत्ल जैसा था, जहां कोई सुराग नहीं था, कोई गवाह नहीं था। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, तो जो सच्चाई सामने आई, वह हैरान कर देने वाली थी।
इस हत्या की पटकथा घर के ही सदस्य ने लिखी थी—मृतक का अपना पोता भारतसिंह! और वजह? जमीन का लालच और पुरानी रंजिश। अपने दो साथियों के साथ मिलकर भारतसिंह ने नशे में धुत्त होकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। लेकिन सबसे संदेहजनक बात यह रही कि हत्या के बाद भी वह पूरे आत्मविश्वास के साथ दादा के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ, मानो कुछ हुआ ही न हो!
खून से रंगी रात: पोते ने क्यों किया अपने ही दादा का कत्ल?
झारड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम लोटिया जुनार्दा में 27 मार्च की सुबह एक दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिला। अर्जुनसिंह की लाश खेत में बनी झोपड़ी से बरामद की गई, जिसका गला बड़ी बेरहमी से रेंता गया था। पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला, गांव वालों ने भी किसी विवाद से इंकार किया, जिससे यह मामला और भी रहस्यमयी हो गया।
जांच आगे बढ़ी, तो पारिवारिक विवाद की एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। अर्जुनसिंह के बेटे गोवर्धनसिंह का कुछ समय पहले निधन हो चुका था। उनकी दो पत्नियां थीं, जिनमें से एक मानसिक रूप से अस्वस्थ थी। गोवर्धनसिंह के बाद अर्जुनसिंह ने अपनी जमीन पोते भारतसिंह और अपने भानजे में बांट दी थी, लेकिन भारतसिंह को यह फैसला नागवार गुजरा। उसे लगा कि दादा ने उसके साथ नाइंसाफी की, और यही घातक सोच उसे एक खूनी साजिश की ओर ले गई।
शराब, साजिश और सनसनीखेज वारदात
थाना प्रभारी आनंद भामोर के अनुसार, भारतसिंह ने अपने दोस्त प्रभुसिंह और दिलीप के साथ मिलकर इस खूनी खेल की योजना बनाई। घटना वाले दिन शराब के नशे में तीनों ने मिलकर दादा को मारने की साजिश रची।
रात के अंधेरे में तीनों बाइक से रामनगर से लोटिया जुनार्दा पहुंचे। उन्हें पता था कि अर्जुनसिंह रात को अकेले खेत पर सोते हैं। वहां पहुंचकर उन्होंने बिना कोई देर किए दादा का गला धारदार गुप्ती से रेंत दिया और तेजी से वहां से फरार हो गए।
हत्या के बाद गांववालों को शक तक नहीं हुआ, क्योंकि सुबह भारतसिंह बिल्कुल सामान्य भाव से अंतिम यात्रा में शामिल हुआ। उसने न तो कोई शोक प्रकट किया, न ही जानने की कोशिश की कि आखिर दादा की हत्या किसने की?
आखिर कैसे पुलिस के हाथ लगे ‘कत्ल के सबूत’?
पुलिस को जब इस हत्या में किसी बाहरी शख्स की भूमिका नहीं मिली, तो उन्होंने परिवार के लोगों से पूछताछ शुरू की।
- पुलिस ने जब गहराई से पारिवारिक विवाद की कड़ियां जोड़ीं, तो शक की सुई भारतसिंह पर जा टिकी।
- उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, और कुछ ही घंटों में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
- उसने बताया कि दादा की संपत्ति में उसे हिस्सा नहीं मिल रहा था, इसलिए उसने इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया।
- पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार (गुप्ती) और बाइक भी बरामद कर ली।
तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें एक दिन की रिमांड पर भेज दिया गया।
सबक: लालच और गुस्सा इंसान को कहां ले जा सकता है!
यह मामला हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि एक जमीन के टुकड़े के लिए पोते ने अपने ही दादा को मार डाला! जिस इंसान ने उसे पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी के खून का प्यासा बन गया।
कई बार लालच, ईर्ष्या और गुस्सा इंसान को इतना अंधा कर देते हैं कि वह अपने ही खून के रिश्तों को खत्म करने से नहीं हिचकिचाता। लेकिन अंततः अपराधी पकड़े जाते हैं, और कानून अपना काम करता है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या इंसान के भीतर की संवेदनाएं इतनी मर चुकी हैं कि वह जमीन-जायदाद के लिए अपने ही अपनों का खून बहाने से नहीं डरता?