मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। पूर्व RTO कांस्टेबल सौरभ शर्मा पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगा था, जिसके बाद लोकायुक्त की छापेमारी में उनके घर से कथित तौर पर अरबों की संपत्ति बरामद हुई थी। इस बीच, परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने सौरभ शर्मा को क्लीन चिट देते हुए कहा कि उनके घर से सोना और नकदी वाली कार नहीं निकली। यह बयान ऐसे समय में आया है जब शर्मा के खिलाफ जांच अभी भी जारी है। मंत्री के बयान के बाद इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मंत्री भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि बीजेपी इस बयान का बचाव कर रही है।
मंत्री ने क्या कहा और कांग्रेस ने क्या उठाए सवाल?
मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने विधानसभा में दिए अपने बयान में कहा कि जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जिस कार में नकदी और सोना मिला था, उसका सौरभ शर्मा के घर से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले तीन सालों में परिवहन विभाग के बैरियरों पर जबरन वसूली की आठ शिकायतें लोकायुक्त को मिली थीं, जिनकी जांच के बाद मामला दर्ज किया गया। हालांकि, कांग्रेस के विधायक लखन घनघोरिया ने इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि तलाशी के दौरान शर्मा के घर से नकदी और सोने से भरी कार मिली थी, लेकिन लोकायुक्त ने इसे नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने मंत्री से पूछा कि जब तीन एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं, तो फिर मंत्री खुद क्लीन चिट कैसे दे सकते हैं?
डायरी और गवाहियों पर भी उठा विवाद
मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि जांच एजेंसियों को सौरभ शर्मा के पास से कोई डायरी नहीं मिली, जबकि कांग्रेस का दावा है कि इस केस में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें विभागीय भ्रष्टाचार से जुड़े बड़े राज छिपे हो सकते हैं। कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या मंत्री ने जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही क्लीन चिट दे दी? इस मुद्दे पर कांग्रेस लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है और इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
पूर्व RTO कांस्टेबल सौरभ शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार के जरिए अरबों की संपत्ति अर्जित की। 19 दिसंबर को लोकायुक्त की टीम ने उनके भोपाल स्थित अरेरा हिल्स के घर और ऑफिस पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनके पास से करोड़ों की संपत्ति और नकदी बरामद करने का दावा किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि उनके सहयोगी चेतन सिंह गौड़ की गाड़ी से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद मिले थे। यह कार चेतन सिंह गौड़ के नाम पर पंजीकृत थी। वहीं, तीसरे आरोपी शरद जायसवाल पर आरोप है कि उसने सौरभ शर्मा की काली कमाई को ठिकाने लगाने में मदद की। इस पूरे मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, और अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि आगे जांच में क्या नया खुलासा होता है।