बजट की बारिश या कोई ‘खेल’?
मध्यप्रदेश सरकार ने 4.21 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दे दी है। यह ऐलान होते ही सरकारी महकमों में खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन कुछ सवाल भी हवा में तैर रहे हैं। क्या यह बजट प्रदेश के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, या फिर सिर्फ कागजी गणित का खेल रह जाएगा? एक अप्रैल से सरकारी खजाने के मुहर खुलने वाली है, लेकिन क्या यह वाकई हर जरूरतमंद तक पहुंचेगी?
अधोसंरचना में बड़ा दांव या छलावा?
इस बार सरकार का सबसे बड़ा खर्च अधोसंरचना पर है, जिसके लिए 70515 करोड़ रुपये की भारी राशि तय की गई है। सड़कों, पुलों और अन्य निर्माण कार्यों पर यह पैसा खर्च होने वाला है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बजट सही तरीके से इस्तेमाल होगा या फिर पुराने प्रोजेक्ट्स की तरह आधे-अधूरे रह जाएंगे? इससे पहले भी कई योजनाएं सिर्फ फाइलों में चलती रहीं, जनता को उनका लाभ नहीं मिला। इस बार सरकार कितनी ईमानदार है, यह देखना दिलचस्प रहेगा।
कृषि और स्वास्थ्य को ‘संजीवनी’ या दिखावा?
कृषि क्षेत्र को 39207 करोड़ रुपये और सामाजिक स्वास्थ्य एवं महिला विकास के लिए 50333 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। सुनने में यह अच्छा लगता है, लेकिन क्या यह पैसा सही जगह पहुंचेगा? किसानों की कर्ज माफी और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पहले भी बड़े सवालों के घेरे में रही है। कहीं यह बजट सिर्फ आकड़ों का हेरफेर तो नहीं? अगर वाकई में यह पैसा योजनाओं में लगा तो प्रदेश में विकास की नई तस्वीर उभर सकती है।
कर्ज और ब्याज: राहत या नया बोझ?
सरकार ने कर्ज चुकाने के लिए 58 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की है, जिसमें ब्याज भुगतान के लिए 28636 करोड़ रुपये और कर्ज अदायगी के लिए 29980 करोड़ रुपये शामिल हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर यह कर्ज लिया क्यों गया और यह पैसा गया कहां? क्या यह सरकारी योजनाओं में लगा या फिर सिर्फ बड़े ठेकेदारों की जेबें भरी गईं? प्रदेश की जनता को इन सवालों का जवाब जरूर चाहिए।
पेंशन का ‘तोहफा’ या छलावा?
पेंशनभोगियों के लिए 28961 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। यह एक राहत की खबर हो सकती है, लेकिन क्या यह रकम सही हाथों तक पहुंचेगी? पहले भी पेंशन भुगतान में गड़बड़ियों की खबरें आई हैं। अगर यह पैसा पूरी ईमानदारी से खर्च हुआ तो लाखों पेंशनधारकों को राहत मिलेगी, लेकिन यदि इसमें भी कोई ‘खेल’ हुआ, तो सरकार को जवाब देना मुश्किल होगा।
निष्कर्ष: उम्मीदें या सिर्फ आंकड़ों का मायाजाल?
इस बजट ने जनता के मन में बड़ी उम्मीदें जगा दी हैं, लेकिन पिछली योजनाओं और उनके क्रियान्वयन को देखते हुए शंकाएं भी कम नहीं हैं। क्या यह बजट वास्तव में प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, या फिर यह भी सिर्फ कागजी खेल बनकर रह जाएगा? जनता अब हर कदम पर निगाहें जमाए बैठी है – देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बार ‘असली विकास’ करती है या फिर सिर्फ ‘वादों की राजनीति’ चलती रहेगी!