तेलंगाना सरकार ने राज्य में बीयर की कीमतों में 15 फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे बीयर पीने वालों को बड़ा झटका लगा है। यह बढ़ोतरी सरकार की नई आबकारी नीति के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य शराब की बिक्री से अधिक राजस्व जुटाना है। नए दाम मंगलवार, 11 फरवरी 2025 से लागू कर दिए गए हैं। तेलंगाना अब दक्षिण भारत के सबसे महंगे बीयर बाजारों में शामिल हो गया है, जहां 650 मिलीलीटर की एक नियमित बीयर बोतल की कीमत करीब 170-180 रुपये तक पहुंच गई है। राज्य सरकार ने आबकारी शुल्क में संशोधन करते हुए इस वृद्धि को लागू किया, जिससे राज्य की आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
सोमवार देर रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, प्रमुख सचिव (राजस्व) एस.ए.एम. रिजवी ने तेलंगाना बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को मूल्य निर्धारण समिति की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया। इस निर्णय में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जायसवाल के नेतृत्व वाले पैनल की भूमिका अहम रही, जिसने 15% की मूल्य वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। वहीं, ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने भी बीयर उत्पादन लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए सरकार से राहत की मांग की थी। पिछले महीने यूनाइटेड ब्रुअरीज ने राज्य सरकार से बकाया भुगतान न मिलने के कारण अपनी आपूर्ति रोक दी थी, जिससे बीयर की उपलब्धता पर भी असर पड़ा।
भारत शराब खपत के मामले में दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है, जहां विभिन्न राज्य अपनी-अपनी शराब नीति के तहत मूल्य निर्धारित करते हैं। तेलंगाना में शराब से सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है और यही वजह है कि नई आबकारी नीति के तहत शराब उत्पादों की कीमतों में संशोधन किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेलंगाना के शराब बाजार में यूनाइटेड ब्रुअरीज की 70% हिस्सेदारी है, जिससे यह राज्य की सबसे प्रभावशाली शराब कंपनियों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मूल्य वृद्धि उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालने के साथ-साथ राज्य की राजस्व बढ़ाने की रणनीति का भी हिस्सा हो सकती है।







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