मध्यप्रदेश सरकार ने शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करते हुए घोषणा की है कि राज्य के सभी स्कूलों में अब NCERT की किताबें लागू की जाएंगी। शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत उठाया जा रहा है। इस निर्णय से प्रदेश के छात्रों को समान और गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त होगी। साथ ही, एनसीईआरटी की किताबें अन्य निजी प्रकाशकों की तुलना में सस्ती होती हैं, जिससे छात्रों के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने गाडरवाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस फैसले की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि CBSE से संबद्ध स्कूलों को अपने निर्धारित मानकों के अनुसार कुछ स्थानीय किताबें रखने की छूट दी जाएगी, लेकिन NCERT की किताबों का उपयोग अनिवार्य होगा। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद मिलेगी और उनका शैक्षिक स्तर अन्य राज्यों के छात्रों के समकक्ष होगा। नई शिक्षा नीति के तहत इस कदम को प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इस नीति का उद्देश्य छात्रों को एक समान और आधुनिक शिक्षा प्रदान करना है, जिससे वे प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। सरकार इस फैसले के पालन को सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाएगी और सभी स्कूलों में NCERT की किताबों का उपयोग अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। इससे शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ेगी, जिससे प्रदेश के छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे और वे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।







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