डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सरकार हर सुविधा को ऑनलाइन कर रही है, वहीं साइबर फ्रॉड के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। भोपाल के कई वाहन मालिकों के साथ ऐसा मामला सामने आया है, जहां उनके वाहन घर पर खड़े होने के बावजूद दूसरे राज्यों में उनके फास्टैग से टोल टैक्स कट गया। भोपाल निवासी प्रवीण दुबे के खाते से हरियाणा के टोल नाके पर बिना उनकी जानकारी के पैसे काटे गए, जबकि उनकी कार घर पर थी। इसी तरह, रवि नाम के व्यक्ति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब वह भोपाल से उज्जैन गए तो बिना टोल नाका पार किए ही उनके फास्टैग से कटौती हो गई। यह मामला सिर्फ एक या दो लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई वाहन मालिकों ने इस तरह के साइबर फ्रॉड की शिकायत की है। सवाल यह उठता है कि क्या फास्टैग के जरिए देशभर में लोगों को ठगा जा रहा है?
फास्टैग को टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए शुरू किया गया था, जिससे गाड़ियों को बिना रुके टोल का भुगतान किया जा सके। लेकिन अब यह सुविधा ही लोगों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद उनका पैसा वापस नहीं मिल रहा है। रवि बताते हैं कि उनके फास्टैग कार्ड से लगातार दो दिन तक रात के 11:58 बजे अलग-अलग टोल प्लाजा पर पैसे कटते रहे, जबकि उनकी गाड़ी कहीं और थी। एक टैक्सी चालक ने भी अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि बिना टोल नाका पार किए ही कई बार उसके खाते से पैसा काटा गया। यह घटना सवाल खड़ा करती है कि क्या फास्टैग के सिस्टम में कोई गंभीर खामी है, या फिर इसके जरिए बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड हो रहा है?
इस पूरे मामले में टोल कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जब एक पीड़ित ने टोल कर्मी से इस बारे में सवाल किया तो उसे जवाब मिला कि अगर गलती से किसी और वाहन का नंबर डाल दिया जाए, तो भी फास्टैग से पैसे कट सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह गलती बार-बार क्यों हो रही है? क्या यह सिस्टम की खामी है या फिर इसके पीछे कोई संगठित साइबर गैंग काम कर रहा है? वहीं, शिकायत करने के बावजूद न तो टोल ऑपरेटर कोई जवाब दे रहे हैं और न ही बैंक से किसी को समाधान मिल रहा है।
अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे साइबर फ्रॉड करार देते हुए सरकार से जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के नाम पर जनता को लूटा जा रहा है और सरकार चुप है। वहीं, बीजेपी विधायक भगवान दास सबनानी का कहना है कि साइबर फ्रॉड कोई भी कर सकता है, लेकिन इस मामले की गंभीरता को समझते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को इसकी जांच करवानी चाहिए। यह मामला सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में कई लोग इस तरह के फास्टैग फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।







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