सिंगरौली जिले के बधौरा पुलिस चौकी अंतर्गत अमिलिया घाटी में हुई हिंसा के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। हालात को नियंत्रित करने के लिए सिंगरौली, सीधी, रीवा और सतना जिलों से 200 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच इलाके की दुकानें बंद कराई जा रही हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। हालांकि, स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन तनाव अब भी बरकरार है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने मृतकों के परिजनों को बिना सूचना दिए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।
हिंसा की शुरुआत तब हुई जब महान एनर्जी कंपनी का एक कोयला लदा ट्रक बाइक सवार दो लोगों को टक्कर मार गया, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा और देखते ही देखते भीड़ ने हिंसक रूप धारण कर लिया। उग्र भीड़ ने सड़क पर खड़े वाहनों में आग लगा दी, जिसमें पांच बसें और तीन डंपर जलकर खाक हो गए। बसों में सवार कंपनी कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की गई। स्थिति को काबू में करने के लिए पहुंची पुलिस को भी ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और थाना प्रभारी का हाथ फ्रैक्चर हो गया। देर रात तक उपद्रव जारी रहा, जिसके बाद पुलिस ने बड़ी मुश्किल से हालात को नियंत्रित किया।
इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है, और जले हुए वाहनों को हटाने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस अब उपद्रवियों की पहचान में जुटी हुई है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अदानी ग्रुप की महान एनर्जी कंपनी की मनमानी के चलते अब तक कोल वाहनों से 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। साथ ही, रोजगार की मांग को लेकर भी ग्रामीण कंपनी प्रबंधन से संघर्ष कर रहे हैं। शुक्रवार को हुए हादसे के बाद जब पुलिस ने बिना परिजनों को सूचित किए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, तो गुस्साए ग्रामीणों ने गड़ा खांड चौराहे और अमिलिया घाटी में सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान वहां से गुजर रही कंपनी की शिफ्ट बस पर भीड़ ने हमला कर दिया, शीशे तोड़ दिए और उसके बाद पांच बसों और तीन डंपरों को आग के हवाले कर दिया। अब प्रशासन उपद्रवियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई केवल प्रदर्शनकारियों पर होगी, या फिर जिम्मेदार कंपनियों पर भी कोई कदम उठाया जाएगा?







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