आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर देशभर में उल्लास और आस्था का माहौल है। इस पर्व का विशेष महत्व सूर्य के उत्तरायण होने से जुड़ा है, और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का अद्वितीय धार्मिक महत्व है। बोकारो की दामोदर नदी पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां परिवार सहित लोग सुबह-सवेरे स्नान करने पहुंचे। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। परंपरागत रूप से इस दिन गुड़ और तिल के व्यंजन खाने और दान करने की प्रथा है। देशभर में, किसी भी नदी में किए गए स्नान को ‘गंगा स्नान’ का महत्व दिया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में अर्जुन के बाण से घायल गंगापुत्र भीष्म पितामह ने आज ही के दिन, सूर्य के उत्तरायण होने पर, अपने प्राण त्यागने का निर्णय लिया था। उनकी इसी प्रतीक्षा का प्रतीक है यह पर्व, जो जीवन के सत्य, धर्म और पुनर्जन्म की मान्यताओं को दर्शाता है। इस शुभ दिन पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और दान-पुण्य कर सुख-समृद्धि की कामना की।
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