Sunday, March 29, 2026

महाकुंभ 2025 में किशोरी राखी ने लिया सन्यास, बनी जूना अखाड़ा की साध्वी गौरी

महाकुंभ 2025 में एक विशेष पल देखने को मिला जब आगरा की 14 वर्षीय राखी, जो कक्षा नौ की छात्रा है, ने सन्यास धारण कर जूना अखाड़ा में प्रवेश लिया। परिवार ने बेटी को पूरी सहमति और गर्व के साथ साध्वी बनने का आशीर्वाद दिया।

महाकुंभ 2025 एक बार फिर पवित्र स्नान और धर्मिक संस्कारों का केंद्र बना हुआ है। लेकिन इस बार एक असाधारण घटना ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। हम बात कर रहे हैं आगरा की राखी सिंह की, जो महज 14 वर्ष की उम्र में सन्यास ग्रहण कर साध्वी गौरी बन गई हैं। आइए जानते हैं कैसे राखी का यह सफर शुरू हुआ और उसके परिवार ने इसे कैसे अपनाया।

आगरा जिले के कुंडौल गांव की रहने वाली राखी सिंह, जो स्प्रिंग फील्ड इंटर कॉलेज में नौवीं कक्षा की छात्रा हैं, ने जूना अखाड़ा में साध्वी के रूप में दीक्षा ली है। राखी बचपन से ही पढ़ाई में तेज और मृदुभाषी रही हैं। उनके दादा रौतान सिंह ने बताया कि वह हमेशा से धार्मिक प्रवृत्ति की रही हैं और कम बोलना उनकी खासियत है। चार प्रश्नों का उत्तर वे एक ही वाक्य में दे देती हैं।

सोमवार को राखी के पिता संदीप सिंह धाकरे, जो डौकी में पेठा फैक्ट्री चलाते हैं, अपनी पत्नी रीमा और बेटी के साथ महाकुंभ पहुंचे। वहाँ, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जूना अखाड़ा के महंत कौशल गिरि ने राखी को शिविर में प्रवेश कराया और उनका नामकरण किया ‘गौरी’। नामकरण के बाद से गौरी अब अपने गुरु के परिवार का हिस्सा बन गई हैं।

राखी के माता-पिता ने बताया कि उन्होंने यह निर्णय किसी दबाव में नहीं, बल्कि बेटी की इच्छा से लिया है। उनकी बेटी में वैराग्य जागृत हुआ और साध्वी बनने की इच्छा प्रबल हो गई। महंत कौशल गिरि ने पुष्टि की कि परिवार और राखी की सहमति से ही यह कदम उठाया गया है। गौरी को आश्रम में शिक्षा और अध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर दिया जाएगा।

राखी की मां रीमा ने बताया कि गुरु कौशल गिरि की कथा और भंडारे के दौरान ही उनकी भक्ति जागृत हुई। पिछले चार वर्षों से पूरा परिवार गुरु सेवा में जुड़ा है। अब उनकी बेटी का पिंडदान 19 जनवरी को होगा, जिसके बाद वह पूरी तरह से साध्वी जीवन में प्रवेश कर जाएगी।

स्प्रिंग फील्ड इंटर कॉलेज के प्रबंधक पीसी शर्मा ने राखी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह होनहार छात्रा हैं और अपनी बातों से दूसरों को प्रभावित करने की कला रखती हैं। साध्वी बनने का उसका निर्णय सराहनीय और साहसिक है।

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