रायसेन: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सिलवानी और बेगमगंज के तीन गांवों में होली पर आग के अंगारों पर चलने की अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस बार करीब 1000 लोगों ने धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी आस्था प्रकट की। खास बात यह है कि बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी इस परंपरा में भाग लेते हैं और किसी के पैर नहीं जलते।
ग्रामीणों की मान्यता है कि इस परंपरा से गांव पर आने वाली आपदा और बीमारियां दूर रहती हैं। सिलवानी और बेगमगंज के इन गांवों में लोग अंगारों पर चलने को शुभ मानते हैं और इसे ईश्वर की कृपा का प्रतीक मानते हैं।
होलिका दहन के बाद, गांवों के चौराहों पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। होली की रात लाल-लाल धधकते अंगारों पर गांव के लोग नंगे पैर चलते हैं। यह नजारा देखने के लिए आसपास के कई जिलों से हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि अंगारों पर चलने के बावजूद किसी को चोट या जलन नहीं होती। इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि सिर्फ युवा और पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी आग के अंगारों पर चलते हैं।
“बच्चे और महिलाएं जलते हुए अंगारों पर ऐसे चलते हैं जैसे फूलों पर चल रहे हों।” इस साल इन गांवों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कई लोगों ने अंगारों पर चलने की इस आस्था का प्रसाद चढ़ाया और गांव के लोगों को शुभकामनाएं दीं। रायसेन जिले के इन गांवों में होली का त्योहार सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं का संगम भी है। धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलने की यह अनूठी परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है, जितनी सैकड़ों साल पहले निभाई जाती थी।







Total Users : 12937
Total views : 32844